कोरोना और निज़ामुद्दीन मरकज़! कोरोना जैसी महामारी से आज पूरा विश्व ग्रसित है और भारत भी इससे अछूता नही रह गया है। जैसे ही ये खबर मीडिया में आयी की मरकज़ निज़ामुद्दीन में लगभग 1500-2000 लोग मौजूद है तो जैसे लगा की देश में एक भूचाल से आ गया है। मेरी नज़र में इस खबर का केवल राजनीतिकरण किया गया। निज़ामुद्दीन में जो कार्यक्रम आयोजित हुआ उस समय तक भारत सरकार या दिल्ली सरकार की कोई भी ऐसा आदेश मौजूद नही था कि इस तरह के धार्मिक आयोजन न किये जाए। 13 मार्च को स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव लव अग्रवाल अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहते है की अभी स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति देश में नहीं है, उस समय तक 81 मामले भारत में दर्ज किये जा चुके थे। 13 मार्च को ही दिल्ली सरकार एक नोटिस जारी करती है जिसमे ये कहा जाता है की किसी भी प्रकार की कॉन्फ्रेंस, खेल की भीड़ या व्यक्तियों का समूह किसी स्थान पर जमा नही हो सकता जिसमे कही भी ये उल्लिखित नही था की कोई भी धार्मिक आयोजन नही होना है। 19 मार्च को प्रधानमंत्री जी 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की घोषणा करते है और लोगो से अपील करते है की शाम को 5 बज...
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कोरोना वायरस
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कोरोना वरदान या अभिशाप ? साउथ मॉर्निंग चीन की रिपोर्ट के अनुसार 17 नवंबर 2019 को कोविड-19 से जुड़ा पहला मामला सामने आता है और देखते देखते पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लेता है। वर्तमान आंकड़ो को देखे तो उसमें सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र में अमेरिका, चीन, ईरान, इटली, फ्रांस, स्पेन, ब्रिटेन आदि देश आते है। अभी तक लगभग 36500 से अधिक मौतें हो चुकी है। प्लेग के बाद शायद ये पहली महामारी है जो इतनी तेज़ी से बढ़ी और बढ़ती ही जा रही है। स्थिति चिंताजनक है। सामने कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है की आगे क्या होगा? विश्व के समस्त वैज्ञानिक यही दावा कर रहे है की इस वायरस का टीका बनाने में कम से कम एक वर्ष का समय लगेगा। वर्तमान स्थिति को देखे तो आज पूरे विश्व में भय का माहौल है और संभावनाओ के आधार पर ही हम जी रहे है। इस परिपेक्ष्य में भारत को देखें तो भारत ने समय रहते कुछ आवश्यक कदम उठा लिए थे परंतु ये कदम और कुछ पहले उठा लिए गए होते तो हम और भी सुरक्षित होते? फिर भी भारत की अच्छी स्थिति अन्य देशो के मुकाबले बनी हुई है। सबसे पहले हमे अंतरराष्ट्रीय सीमा को सील करना चाहिए था परंतु इसमे कहीं...