कोरोना वायरस

कोरोना वरदान या अभिशाप?
साउथ मॉर्निंग चीन की रिपोर्ट के अनुसार 17 नवंबर 2019 को कोविड-19 से जुड़ा  पहला मामला सामने आता है और देखते देखते पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लेता है। वर्तमान आंकड़ो को देखे तो  उसमें सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र में अमेरिका, चीन, ईरान, इटली, फ्रांस, स्पेन, ब्रिटेन आदि देश आते है। अभी तक लगभग 36500 से अधिक मौतें हो चुकी है।
प्लेग के बाद शायद ये पहली महामारी है जो इतनी तेज़ी से बढ़ी और बढ़ती ही जा रही है। स्थिति चिंताजनक है। सामने कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है की आगे क्या होगा? विश्व के समस्त वैज्ञानिक यही दावा कर रहे है की इस वायरस का टीका बनाने में कम से कम एक वर्ष का समय लगेगा। वर्तमान स्थिति को देखे तो आज पूरे विश्व में भय का माहौल है और  संभावनाओ के आधार पर ही हम जी रहे है।
इस परिपेक्ष्य में भारत को देखें तो भारत ने समय रहते कुछ आवश्यक कदम उठा लिए थे परंतु ये कदम और कुछ पहले उठा लिए गए होते तो हम और भी सुरक्षित होते? फिर भी भारत की अच्छी स्थिति अन्य देशो के मुकाबले बनी हुई है। सबसे पहले हमे अंतरराष्ट्रीय सीमा को सील करना चाहिए था परंतु इसमे कहीं न कही देरी हुई। परंतु अब जो भी है हमें सावधान रहने की आवश्यकता है।
जिस प्रकार मौतें बढ़ती जा रही है विज्ञान कही न कही प्रकृति के सामने बेबस नज़र आ रहा है। यदि ये बढ़ता प्रकोप न रुका तो वास्तव में यह मानव जाति के लिए अभिशाप सिद्ध होगा।

कोरोना वरदान कैसे ?
एक कहावत कही गयी है की जब भी कोई विपत्ति हमारे ऊपर आती है तो वो केवल अपने साथ समस्याही नही लाती साथ में कुछ सीख भी लाती है। कुछ इसी तरह की सीख ये वायरस भी लाया है। उदाहरणतया-
1- वर्तमान समय में हम लापरवाह अधिक हो चले थे। इसने (कोरोना) हमे सावधान कर दिया। उदाहरणस्वरूप ईआज हर व्यक्ति सफाई का ध्यान रखने पर मजबूर है। जो भी किसी आवश्यक कार्य से बाहर गया हो वो आते ही सर्वप्रथम हाथ धुलता है।
2- आज लगभग आधे से ज़्यादा विश्व में लॉक डाउन चल रहा जिसकी वजह से प्रदूषण में काफी गिरावट देखी गयी है। आकाश में आज़ाद पक्षी नज़र आये, सड़को पे बेबाक हिरण दिखाई दिए।
3- आज हर व्यक्ति सोशल डिस्टेंसिंग की बनाने की बात करता है परंतु मैं वरिष्ठ पत्रकार राजदीप देसाई का शब्द फिजिकल डिस्टनसिंग का प्रयोग करूँगा। आज हम भलीभांति इस बात को महसूस कर सकते है की समाज के एक तबके को कैसे हमने अलग किया था। आज इस महामारी के ज़रिये हम उनकी पीड़ा का महसूस कर सकते है जो उन्होंने हज़ारो साल झेला है।
4- जहाँ भी कर्फ्यू लगा कर लोगो को क़ैद कर दिया जाता था उसे आज हम महसूस कर सकते है।

इस प्रकार यह वायरस हमें जीवन के के मत्वपूर्ण पहलू को समझा गया है की जीवन कैसे जीना है.....
इसके साथ आप सभी से अनुरोध है की घरों के बाहर न निकले। यदि आती आवश्यक हो तो पूरी सावधानी से निकले। सरकार व विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा निर्देशो का पालन करे। सुरक्षित रहे और यदि आसपास कोई मज़दूर ग़रीब परिवार हो जिसके पास खाने पीने की समस्या हो उसकी सहायता अवश्य करें।
 मोहम्मद दानिश

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