कोरोना और निज़ामुद्दीन मरकज़!
कोरोना जैसी महामारी से आज पूरा विश्व ग्रसित है और भारत भी इससे अछूता नही रह गया है। जैसे ही ये खबर मीडिया में आयी की मरकज़ निज़ामुद्दीन में लगभग 1500-2000 लोग मौजूद है तो जैसे लगा की देश में एक भूचाल से आ गया है।
मेरी नज़र में इस खबर का केवल राजनीतिकरण किया गया। निज़ामुद्दीन में जो कार्यक्रम आयोजित हुआ उस समय तक भारत सरकार या दिल्ली सरकार की कोई भी ऐसा आदेश मौजूद नही था कि इस तरह के धार्मिक आयोजन न किये जाए। 13 मार्च को स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव लव अग्रवाल अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहते है की अभी स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति देश में नहीं है, उस समय तक 81 मामले भारत में दर्ज किये जा चुके थे। 13 मार्च को ही दिल्ली सरकार एक नोटिस जारी करती है जिसमे ये कहा जाता है की किसी भी प्रकार की कॉन्फ्रेंस, खेल की भीड़ या व्यक्तियों का समूह किसी स्थान पर जमा नही हो सकता जिसमे कही भी ये उल्लिखित नही था की कोई भी धार्मिक आयोजन नही होना है। 19 मार्च को प्रधानमंत्री जी 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की घोषणा करते है और लोगो से अपील करते है की शाम को 5 बजे थाली या ताली बजाए। जिसके परिणामस्वरूप हम देखते है की 22 मार्च को शाम में लोग इसे एक उत्सव की तरह मनाते है और बहोत बड़ी संख्या में लोग सड़को पर भी नज़र आते है।
इसी के साथ हम देखते ही कि स्वर्ण मंदिर काफी समय तक खुला रहता है। 23 मार्च को शिवराज चौहान शपथ लेते और काफी भीड़ इकट्ठा करते है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार 16 मार्च तक तिरुपतिबालाजी मंदिर खुला रहता है जिसमे हर घंटे 4000 लोग दर्शन करने आते है। सिद्धिविनायक मंदिर 16 मार्च तक खुला रहता है। उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर 16 मार्च तक, श्री साई बाबा मन्दिर 17 मार्च तक, वैष्णो देवी मंदिर 18 मार्च तक, महाकाशी विश्वनाथ मन्दिर 20 मार्च तक खुले रहते है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 26 मार्च को पूजा करने अयोध्या 5 से 6 लोगो के साथ जाते है। एक खबर और आती की वैष्णो देवी में लगभग 400 लोग फस गए थे। तो केवल निज़ामुद्दीन में हुए कार्यक्रम को ही केवल क्यों उछाला जा रहा है?
निज़ामुद्दीन में फसे लोगो को देखें तो उसमे जो भी लोग थे वो 13 मार्च तक वहाँ पहुच चुके थे। निज़ामुद्दीनमें जो कार्यक्रम आयोजित किया गया वो 13, 14, 15 मार्च को आयोजित हुआ उसके बाद वहाँ से कुछ लोग निकल गए और कुछ वही रुके रहे। सोशल डिस्टेनसिंग ( फिजिकल डिस्टनसिंग) चर्चा में 19 मार्च को आता है जब प्रधानमंत्री 22 मार्च को जनता कर्फ़्यू का आह्वान करते है। तो लोग उसका पालन करते हुए उसी निज़ामुद्दीन धर्मशाला में रुक जाते है। इधर जनता कर्फ़्यू ख़त्म होता उधर केजरीवाल सरकार ने लॉक डाउन कर दिया। इसके बाद वहाँ की संस्था ने 25 मार्च को SHO को पत्र लिखकर वहाँ से निकलने के लिए वाहन अनुमति मांगी जाती है परन्तु अनुमति न मिलने पर वे वहीं ठहरे रहे।
इधर हम अन्य लोगों को देखे तो लखनऊ में अकबर अहमद डंपी के घर पार्टी में भारतीय जनता पार्टी के सांसद दुष्यंत सिंह, वसुंधरा राजे, उ प्र के स्वस्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह भी मौजूद रहे। जिसमें कनिका कपूर संक्रमित पायी गयी थी। यहाँ से निकल कर दुष्यंत सिंह संसद की करवाई में हिस्सा लेने भी पहुचे।
उधर साक्षी महाराज 23 मार्च को मथुरा में एक कार्यक्रम आयोजित करते है।
इधर जैसे ही लॉक डाउन का एलान होता है तो लाखों की संख्या में दिहाड़ी मज़दूर सड़को पर आ जाते है। जिनको भेजने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1000 बसों का इन्तेज़ाम करते है।
1 बस में 60 व्यक्ति बैठते है इस प्रकार कुल 60000 व्यक्ति वहाँ (दिल्ली) से निकलते है। इस ममले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई होती है जिसमे सॉलिसिटर जनरल कहते है की 10 में 3 व्यक्ति कोरोना से संक्रमित है अर्थात लगभग 18000 को लोग संक्रमित है और उससे अन्य लोग भी संक्रमित होंने की आशंका है। दिहाड़ी मज़दूरों को रखने के लिए जो शेल्टर बनाये गए है उसमे 10 से 15 हज़ार लोग एक साथ है जो निज़ामुद्दीन से काफी अधिक है।
बात निज़ामुद्दीन की करते है तो वहाँ के मुखिया मौलाना साद है जो कि एक विवादित व्यक्ति है। इन्होंने एक बयान में कहा की मुस्लिमों के तीर्थो में तीसरा नंबर निज़ामुद्दीन मरकज़ का है। जिससे बहुत विवाद हुआ और उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी। उनका यह व्यक्तिगत विचार था कि जब कोई विपत्ति आ जाए तो हमे अल्लाह के नज़दीक होना चाहिए अर्थात मस्जिद में। परन्तु इस्लाम कहता है की यदि कोई समस्या है जैसे महामारी फैली हो तो आप नमाज़ घर में पढ़े। उनके अन्य भी कई विवादित बयान है जो उनकी रूढ़िवादी सोच को दर्शित करता है।
बात जमातियों की करते है, ये लोग हमेशा हो पुलिस और इंटेलिजेंसकी नज़र में रहे है। इंदिरा गांधी ने एक बार इंटेलिजेंस इन जमातियों के पीछे लगाई थी। रिपोर्ट में अधिकारी ने कहा की इन लोगो के पास कुछ भी नही है ये लोग या तो ज़मीन के 6 फुट नीचे की बात करते है या ऊपर आसमान की, इनका इस धरती से कुछ लेना देना नही है।
दिल्ली पुलिस ने 6 या 7 पर प्राथमिकी दर्ज की है। जो भी कानून है यदि कोई अपराधी है तो उसे दंड अवश्य मिलना चाहिए।
उपरोक्त विवरण देने का एकमात्र उद्देश्य यह है कि निज़ामुद्दीन में लोग फस गए थे जिन्होंने पूर्णतया नियम के पालन किया। इस प्रकार चाहे वो वैष्णो देवी में फसे हो या निज़ामुद्दीन में वो फसे ही थे छिपे नही।
हमें चाहिए की अपना ध्यान रखे और अपने आसपास लोगो को जागरूक करे जो लोग भी आपके संपर्क में है। न्यूज़ चैनल में लोगो को बाटने का काम बहुत तेज़ी से चल रहा है। हमे चाहिए की हम सुरक्षित रहे और अपने लोगों को सुरक्षित रखें। अपने घर में रहे सुरक्षित रहे।
मोहम्मद दानिश
मेरी नज़र में इस खबर का केवल राजनीतिकरण किया गया। निज़ामुद्दीन में जो कार्यक्रम आयोजित हुआ उस समय तक भारत सरकार या दिल्ली सरकार की कोई भी ऐसा आदेश मौजूद नही था कि इस तरह के धार्मिक आयोजन न किये जाए। 13 मार्च को स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव लव अग्रवाल अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहते है की अभी स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति देश में नहीं है, उस समय तक 81 मामले भारत में दर्ज किये जा चुके थे। 13 मार्च को ही दिल्ली सरकार एक नोटिस जारी करती है जिसमे ये कहा जाता है की किसी भी प्रकार की कॉन्फ्रेंस, खेल की भीड़ या व्यक्तियों का समूह किसी स्थान पर जमा नही हो सकता जिसमे कही भी ये उल्लिखित नही था की कोई भी धार्मिक आयोजन नही होना है। 19 मार्च को प्रधानमंत्री जी 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की घोषणा करते है और लोगो से अपील करते है की शाम को 5 बजे थाली या ताली बजाए। जिसके परिणामस्वरूप हम देखते है की 22 मार्च को शाम में लोग इसे एक उत्सव की तरह मनाते है और बहोत बड़ी संख्या में लोग सड़को पर भी नज़र आते है।
इसी के साथ हम देखते ही कि स्वर्ण मंदिर काफी समय तक खुला रहता है। 23 मार्च को शिवराज चौहान शपथ लेते और काफी भीड़ इकट्ठा करते है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार 16 मार्च तक तिरुपतिबालाजी मंदिर खुला रहता है जिसमे हर घंटे 4000 लोग दर्शन करने आते है। सिद्धिविनायक मंदिर 16 मार्च तक खुला रहता है। उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर 16 मार्च तक, श्री साई बाबा मन्दिर 17 मार्च तक, वैष्णो देवी मंदिर 18 मार्च तक, महाकाशी विश्वनाथ मन्दिर 20 मार्च तक खुले रहते है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 26 मार्च को पूजा करने अयोध्या 5 से 6 लोगो के साथ जाते है। एक खबर और आती की वैष्णो देवी में लगभग 400 लोग फस गए थे। तो केवल निज़ामुद्दीन में हुए कार्यक्रम को ही केवल क्यों उछाला जा रहा है?
निज़ामुद्दीन में फसे लोगो को देखें तो उसमे जो भी लोग थे वो 13 मार्च तक वहाँ पहुच चुके थे। निज़ामुद्दीनमें जो कार्यक्रम आयोजित किया गया वो 13, 14, 15 मार्च को आयोजित हुआ उसके बाद वहाँ से कुछ लोग निकल गए और कुछ वही रुके रहे। सोशल डिस्टेनसिंग ( फिजिकल डिस्टनसिंग) चर्चा में 19 मार्च को आता है जब प्रधानमंत्री 22 मार्च को जनता कर्फ़्यू का आह्वान करते है। तो लोग उसका पालन करते हुए उसी निज़ामुद्दीन धर्मशाला में रुक जाते है। इधर जनता कर्फ़्यू ख़त्म होता उधर केजरीवाल सरकार ने लॉक डाउन कर दिया। इसके बाद वहाँ की संस्था ने 25 मार्च को SHO को पत्र लिखकर वहाँ से निकलने के लिए वाहन अनुमति मांगी जाती है परन्तु अनुमति न मिलने पर वे वहीं ठहरे रहे।
इधर हम अन्य लोगों को देखे तो लखनऊ में अकबर अहमद डंपी के घर पार्टी में भारतीय जनता पार्टी के सांसद दुष्यंत सिंह, वसुंधरा राजे, उ प्र के स्वस्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह भी मौजूद रहे। जिसमें कनिका कपूर संक्रमित पायी गयी थी। यहाँ से निकल कर दुष्यंत सिंह संसद की करवाई में हिस्सा लेने भी पहुचे।
उधर साक्षी महाराज 23 मार्च को मथुरा में एक कार्यक्रम आयोजित करते है।
इधर जैसे ही लॉक डाउन का एलान होता है तो लाखों की संख्या में दिहाड़ी मज़दूर सड़को पर आ जाते है। जिनको भेजने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1000 बसों का इन्तेज़ाम करते है।
1 बस में 60 व्यक्ति बैठते है इस प्रकार कुल 60000 व्यक्ति वहाँ (दिल्ली) से निकलते है। इस ममले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई होती है जिसमे सॉलिसिटर जनरल कहते है की 10 में 3 व्यक्ति कोरोना से संक्रमित है अर्थात लगभग 18000 को लोग संक्रमित है और उससे अन्य लोग भी संक्रमित होंने की आशंका है। दिहाड़ी मज़दूरों को रखने के लिए जो शेल्टर बनाये गए है उसमे 10 से 15 हज़ार लोग एक साथ है जो निज़ामुद्दीन से काफी अधिक है।
बात निज़ामुद्दीन की करते है तो वहाँ के मुखिया मौलाना साद है जो कि एक विवादित व्यक्ति है। इन्होंने एक बयान में कहा की मुस्लिमों के तीर्थो में तीसरा नंबर निज़ामुद्दीन मरकज़ का है। जिससे बहुत विवाद हुआ और उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी। उनका यह व्यक्तिगत विचार था कि जब कोई विपत्ति आ जाए तो हमे अल्लाह के नज़दीक होना चाहिए अर्थात मस्जिद में। परन्तु इस्लाम कहता है की यदि कोई समस्या है जैसे महामारी फैली हो तो आप नमाज़ घर में पढ़े। उनके अन्य भी कई विवादित बयान है जो उनकी रूढ़िवादी सोच को दर्शित करता है।
बात जमातियों की करते है, ये लोग हमेशा हो पुलिस और इंटेलिजेंसकी नज़र में रहे है। इंदिरा गांधी ने एक बार इंटेलिजेंस इन जमातियों के पीछे लगाई थी। रिपोर्ट में अधिकारी ने कहा की इन लोगो के पास कुछ भी नही है ये लोग या तो ज़मीन के 6 फुट नीचे की बात करते है या ऊपर आसमान की, इनका इस धरती से कुछ लेना देना नही है।
दिल्ली पुलिस ने 6 या 7 पर प्राथमिकी दर्ज की है। जो भी कानून है यदि कोई अपराधी है तो उसे दंड अवश्य मिलना चाहिए।
उपरोक्त विवरण देने का एकमात्र उद्देश्य यह है कि निज़ामुद्दीन में लोग फस गए थे जिन्होंने पूर्णतया नियम के पालन किया। इस प्रकार चाहे वो वैष्णो देवी में फसे हो या निज़ामुद्दीन में वो फसे ही थे छिपे नही।
हमें चाहिए की अपना ध्यान रखे और अपने आसपास लोगो को जागरूक करे जो लोग भी आपके संपर्क में है। न्यूज़ चैनल में लोगो को बाटने का काम बहुत तेज़ी से चल रहा है। हमे चाहिए की हम सुरक्षित रहे और अपने लोगों को सुरक्षित रखें। अपने घर में रहे सुरक्षित रहे।
मोहम्मद दानिश
Absolutely right
ReplyDeleteThanku brother
Deleteji Thanks alot
Deleteसच्चाई के काफी करीब है आपका लेख है मीडिया यदि निष्पक्ष रहे तो देश में सदभाव बढ़े
ReplyDeleteJi sir koshish krta hu sach hi likhu
Delete