Posts

Showing posts from April, 2017

रिश्वतखोरी एक इज़्ज़त का सिम्बल बन गया है...

आज के दौर में रिश्वतखोरी समाज में स्टेटस सिंबल बन गयी है कौन सबसे बड़ा रिश्वतखोर है वही समाज का सबसे ज़्यादा संम्मानित समझा जाता है वह रिश्वतखोर समाज के हर तबके के आँखों के दु...

अज़ान देना गुंडागर्दी - सोनू निगम

अज़ान देना गुंडागर्दी-सोनू निगम अज़ान देना कब से गुंडागर्दी हो गया समझ ही नही आया। यदि अज़ान देना गुंडा गर्दी की लिस्ट में शामिल है तो गौ रक्षा के नाम पे लड़कियों का बलात्कार करना ,लोगो को जान से मार देना ये गुंडागर्दी की किस श्रेणी में रखा जाएगा? लोगो को पकड़ के ज़बरदस्ती जै श्री राम बोलवाला गुंडागर्दी की किस श्रेणी में है?किस एक धर्म को टारगेट बना के बुरा भला कहना उनके साथ हिंसा करना गुंडागर्दी की किस श्रेणी में है?समझ मे बात ये नही आती के आज तक सोनू साहब भारत से बाहर रहा करते थे क्या ?या फिर ये किसी ऐसे मुल्क में रहते थे जहाँ मुसलमान नही था। उन्होंने लगभग अपनी  उम्र के लगभग 50 वर्ष पूरे कर लिए क्या अब तक उन्हें आवाज़ पहली बार सुनाई दी जो तकलीफ देने लगी? आखिर ये भेदभाव क्यों चलने लगा है ? हर धर्मो के धार्मिक स्थलों से आवाज़ सुबह ही निकलती है उनसे तकलीफ नही ?आखिर आप उन लोगो पे सवाल क्यों नही खड़ा करते जो आरक्षण के लिए रेप, दंगा , हत्या जैसे कार्य करते है। तो ये गुंडा गर्दी की किस श्रेणी में है?  समझ मे नही आया कि सोनू की जगह लोग अर्जित को पसंद करने लगे ये सजी फ्रस्टेशन है या कुछ और...

जन सुचना अधिकार पर सरकार की छेड़छड़ क्यों??

Image
जन सूचना अधिकार पर सरकार की छेड़छाड़ क्यों? आर. टी. आई. एक्ट 2005 एक मज़बूत हथियार है जो जन सुचना अधिकार के तहत जनता को हासिल हुआ है। आर. टी. आई. के माध्यम से जन क्रांति लाइ गई। श्री अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री बन गए और कितने ही  उपेछित वंचित लोगों को उनका अधिकार मिल गया । आज सरकार इस अधिकार को  कमजोर करने के बारे में विचार कर रही है कुछ संशोधन करके उसकी उपियोगिता के दायरे को जटिल बनाना चाहती है।  यह एक्ट जब पारित हुआ था सारे विकल्पों को ध्यान में रखकर उसको मज़बूत जन सूचना अधिकार बनाया गया था।  ऐसे में संशोधनो का औचित्य क्या है यह शंकाओं को जन्म दे रहा है जन सूचना के हथियार को और उपयोगी और सस्ता बनाने के  बजाय महंगा  और जटिल बनाना लोकशक्ति को कमज़ोर करना है। यह जनतांत्रिक मूल्यों के प्रति उपेछा का रवैया कहा जा सकता है इसलिए इस तरफ हुकूमत का ध्यान  आकृष्ट करना हम सब का फ़र्ज़ है केंद्र सरकार आर. टी. आई. एक्ट में कोई तरमीम न करे यह जनहित में नही है।  मौजूदा सरकार इस बात पर भी ग़ौर करे कि 2014 में एन. डी. ए. सरकार बनाने में आर. टी. आई. एक्टिविस्ट का ...