जन सुचना अधिकार पर सरकार की छेड़छड़ क्यों??
आर. टी. आई. एक्ट 2005 एक मज़बूत हथियार है जो जन सुचना अधिकार के तहत जनता को हासिल हुआ है। आर. टी. आई. के माध्यम से जन क्रांति लाइ गई। श्री अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री बन गए और कितने ही उपेछित वंचित लोगों को उनका अधिकार मिल गया । आज सरकार इस अधिकार को कमजोर करने के बारे में विचार कर रही है कुछ संशोधन करके उसकी उपियोगिता के दायरे को जटिल बनाना चाहती है। यह एक्ट जब पारित हुआ था सारे विकल्पों को ध्यान में रखकर उसको मज़बूत जन सूचना अधिकार बनाया गया था।
ऐसे में संशोधनो का औचित्य क्या है यह शंकाओं को जन्म दे रहा है जन सूचना के हथियार को और उपयोगी और सस्ता बनाने के बजाय महंगा और जटिल बनाना लोकशक्ति को कमज़ोर करना है। यह जनतांत्रिक मूल्यों के प्रति उपेछा का रवैया कहा जा सकता है इसलिए इस तरफ हुकूमत का ध्यान आकृष्ट करना हम सब का फ़र्ज़ है केंद्र सरकार आर. टी. आई. एक्ट में कोई तरमीम न करे यह जनहित में नही है।
मौजूदा सरकार इस बात पर भी ग़ौर करे कि 2014 में एन. डी. ए. सरकार बनाने में आर. टी. आई. एक्टिविस्ट का बहोत अहम भूमिका थी।
सरकारी कार्यो में पारदर्शिता लाने में जन सुचना अधिकार ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जन सूचना अधिनियम और खाद्य सुरक्षा अधिनियम दो ऐसे जन अधिकार है जिनके लिए लंबे अरसे तक डॉ. मनमोहन सिंह की यू. पी. ए. सरकार को याद रखा जायेगा । सत्ता परिवर्तन राजनीती का शाश्वत नियम है लेकिन विचारधाराओ में अंतर होने के कारण जनहित में पूर्वर्ती सरकार के लिए गए निर्णयों में परिवर्तन नही किया जाना चाहिए यही स्वस्थ लोक परंपरा है इसे ध्यान में रखना चाहिए
असलम नक़वी

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