अज़ान देना गुंडागर्दी - सोनू निगम
अज़ान देना गुंडागर्दी-सोनू निगम
अज़ान देना कब से गुंडागर्दी हो गया समझ ही नही आया। यदि अज़ान देना गुंडा गर्दी की लिस्ट में शामिल है तो गौ रक्षा के नाम पे लड़कियों का बलात्कार करना ,लोगो को जान से मार देना ये गुंडागर्दी की किस श्रेणी में रखा जाएगा? लोगो को पकड़ के ज़बरदस्ती जै श्री राम बोलवाला गुंडागर्दी की किस श्रेणी में है?किस एक धर्म को टारगेट बना के बुरा भला कहना उनके साथ हिंसा करना गुंडागर्दी की किस श्रेणी में है?समझ मे बात ये नही आती के आज तक सोनू साहब भारत से बाहर रहा करते थे क्या ?या फिर ये किसी ऐसे मुल्क में रहते थे जहाँ मुसलमान नही था। उन्होंने लगभग अपनी उम्र के लगभग 50 वर्ष पूरे कर लिए क्या अब तक उन्हें आवाज़ पहली बार सुनाई दी जो तकलीफ देने लगी? आखिर ये भेदभाव क्यों चलने लगा है ? हर धर्मो के धार्मिक स्थलों से आवाज़ सुबह ही निकलती है उनसे तकलीफ नही ?आखिर आप उन लोगो पे सवाल क्यों नही खड़ा करते जो आरक्षण के लिए रेप, दंगा , हत्या जैसे कार्य करते है। तो ये गुंडा गर्दी की किस श्रेणी में है?
समझ मे नही आया कि सोनू की जगह लोग अर्जित को पसंद करने लगे ये सजी फ्रस्टेशन है या कुछ और? अगर उनको अज़ान से तकलीफ थी तो 2017 का इंतज़ार कर रहे थे कि मैं 2017 में ही बोलूंगा?
और सबसे बड़ी की मीडिया जो है वो फालतू की बहस करती है आज की जो मीडिया है वो देश की आर्थिक स्थिति पे बहस नही करती सरकार के काले कारनामो पे बहस नही करती? सोनू को किसी भी मीडिया ने अपने सेट पे नही बुलाया के आखिर अपने ये बात क्यों कही? बुलाया तो किसे महंतो और मौलानाओ को आखिर उससे सवाल क्यों नही जिसको 50 साल बाद तकलीफ हुई है?
विनम्र निवेदन करना चाहता हु की सेक्युलिरज़म को बनाये रखे। भारत की अखंडता पे आंच न आने दें...
दानिश अलमदार
अज़ान देना कब से गुंडागर्दी हो गया समझ ही नही आया। यदि अज़ान देना गुंडा गर्दी की लिस्ट में शामिल है तो गौ रक्षा के नाम पे लड़कियों का बलात्कार करना ,लोगो को जान से मार देना ये गुंडागर्दी की किस श्रेणी में रखा जाएगा? लोगो को पकड़ के ज़बरदस्ती जै श्री राम बोलवाला गुंडागर्दी की किस श्रेणी में है?किस एक धर्म को टारगेट बना के बुरा भला कहना उनके साथ हिंसा करना गुंडागर्दी की किस श्रेणी में है?समझ मे बात ये नही आती के आज तक सोनू साहब भारत से बाहर रहा करते थे क्या ?या फिर ये किसी ऐसे मुल्क में रहते थे जहाँ मुसलमान नही था। उन्होंने लगभग अपनी उम्र के लगभग 50 वर्ष पूरे कर लिए क्या अब तक उन्हें आवाज़ पहली बार सुनाई दी जो तकलीफ देने लगी? आखिर ये भेदभाव क्यों चलने लगा है ? हर धर्मो के धार्मिक स्थलों से आवाज़ सुबह ही निकलती है उनसे तकलीफ नही ?आखिर आप उन लोगो पे सवाल क्यों नही खड़ा करते जो आरक्षण के लिए रेप, दंगा , हत्या जैसे कार्य करते है। तो ये गुंडा गर्दी की किस श्रेणी में है?
समझ मे नही आया कि सोनू की जगह लोग अर्जित को पसंद करने लगे ये सजी फ्रस्टेशन है या कुछ और? अगर उनको अज़ान से तकलीफ थी तो 2017 का इंतज़ार कर रहे थे कि मैं 2017 में ही बोलूंगा?
और सबसे बड़ी की मीडिया जो है वो फालतू की बहस करती है आज की जो मीडिया है वो देश की आर्थिक स्थिति पे बहस नही करती सरकार के काले कारनामो पे बहस नही करती? सोनू को किसी भी मीडिया ने अपने सेट पे नही बुलाया के आखिर अपने ये बात क्यों कही? बुलाया तो किसे महंतो और मौलानाओ को आखिर उससे सवाल क्यों नही जिसको 50 साल बाद तकलीफ हुई है?
विनम्र निवेदन करना चाहता हु की सेक्युलिरज़म को बनाये रखे। भारत की अखंडता पे आंच न आने दें...
दानिश अलमदार
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