रिश्वतखोरी एक इज़्ज़त का सिम्बल बन गया है...

आज के दौर में रिश्वतखोरी समाज में स्टेटस सिंबल बन गयी है कौन सबसे बड़ा रिश्वतखोर है वही समाज का सबसे ज़्यादा संम्मानित समझा जाता है वह रिश्वतखोर समाज के हर तबके के आँखों के दुलारे बन जाते हैं इस्लाम ने रिश्वतखोरी की जितनी निंदा की है उतनी ही ज़्यादा खिलाफवर्जी करने वालों की तादाद बढ़ रही है इनके मोहपाश से धर्म के ज़िम्मेदार हज़रात भी अलग नहीं हैं वह भी उसके हमाम में नगें नज़र आते हैं रिश्वतखोरी का यह आलम है कि बंदरबाट करके यह यह भी नहीं देखते की जिससे रिश्वत ली  है उसका काम हुआ भी की नहीं वह बेचारा क़र्ज़ के बोझ का मारा अपने काम को मोकम्मल कराने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाता फिरे और फिर एक और रिश्वतखोर का सामना करे लेकिन इन बातों का असर होना नहीं है रिश्वतखोर लोग हर जगह बाइज़्ज़त तरीके से हर मजलिसों महफ़िल में मेह्मानाने खुसूसी के तौर पर नज़र आएंगे और हम आप उनको इज़्ज़त देते नजर आएंगे क्योंकि वह लोग इमाम जाफर सादिक़ (  आ.स)की निगाह में बदतरीन हों तो हों मगर समाज की निगाह में तो बेहतरीन हैं ही इसलिए कुल मिलाकर आली जनाब रिश्वतखोर ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद

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