शहीदी दिवस
शहीद दिवस
शहीद भगत सिंह और उनके साथी राजगुरु और सुखदेव जी को 23 मार्च 1939 को फाँसी पर लटका दिया गया था। शायद हम आज अपनी भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में सब कुछ भूल चुके है ,हमे यद् ही नही की शहीदी दिवस क्या है अभी सड़को पर आम लोगो से पूछा जाए आज क्या है तो शायद ही कोई बात पाये। परंतु हमे इन बातों का ध्यान जरुरी है कि हम इस बारे में जानें। क़ुरान में लिखा है कि "एहसान का बदला एहसान से दिया जाता है"। उन हस्तियों जो हमारे लिए किया हमें उसको ऐसे ही नही भुला देना चाहिए। किसी महान पुरुष ने कहा था कि "जब आप अपने घर जाना तो कहना की हमने तुम्हारे कल के लिए अपना आज दे दिया"। जब उन्होंने हमारे लिए अपनी जानो की परवाह नही की तो हमे भी चाहिए कि हम अपनी इन नायाब हस्तियों को याद रखें।
दानिश अलमदार
Comments
Post a Comment