कुलभूषण जाधव मामले पे मिली भारत को दमदार जीत कुलभूषण जाधव का मामला इंटरनेशनल कोर्ट में पेश किया गया, इस मामले में दोनों देशों ने अपना अपना पक्ष रखा । इसमे भारत की तरफ से अपना पक्ष हरीश साल्वे साहब रख रहे थे, जिनके बारे में कहा जाता है कि ये एक दिन की फीस ₹30 लाख है। परंतु इन्होंने मात्र ₹1 में यह केस लड़ा। ये वही हरीश साल्वे है जो सन 2007 में याक़ूब मेमन के पक्षकार थे और फिर मामला जब सर्वोच्च न्यायालय में गया तो वो उनके फांसी के फैसले से सहमत नही थे। तब उन्हें बड़ी आलोचनाओ का सामना करना पड़ा था। यह तक कि लोगो ने देशद्रोही भी कहा था। मेरा सवाल बस इतना है कि आखिर क्या किसी की देशभक्ति और देशद्रोहिता का फैसला लोग सड़कों पर कर देंगे ? कुलभूषण मामले पर हमारे भारतवर्ष की विजय हुई। जीत हमेशा सत्य की होती है भले ही उसमे कुछ समय लग जाये। इन चीज़ों से लगता है कि दुनिया मे आज भी सही और ग़लत का फैसला करने वाले है मौजूद है। जय हिंद दानिश अलमदार
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Showing posts from 2017
अज़ान देना गुंडागर्दी - सोनू निगम
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अज़ान देना गुंडागर्दी-सोनू निगम अज़ान देना कब से गुंडागर्दी हो गया समझ ही नही आया। यदि अज़ान देना गुंडा गर्दी की लिस्ट में शामिल है तो गौ रक्षा के नाम पे लड़कियों का बलात्कार करना ,लोगो को जान से मार देना ये गुंडागर्दी की किस श्रेणी में रखा जाएगा? लोगो को पकड़ के ज़बरदस्ती जै श्री राम बोलवाला गुंडागर्दी की किस श्रेणी में है?किस एक धर्म को टारगेट बना के बुरा भला कहना उनके साथ हिंसा करना गुंडागर्दी की किस श्रेणी में है?समझ मे बात ये नही आती के आज तक सोनू साहब भारत से बाहर रहा करते थे क्या ?या फिर ये किसी ऐसे मुल्क में रहते थे जहाँ मुसलमान नही था। उन्होंने लगभग अपनी उम्र के लगभग 50 वर्ष पूरे कर लिए क्या अब तक उन्हें आवाज़ पहली बार सुनाई दी जो तकलीफ देने लगी? आखिर ये भेदभाव क्यों चलने लगा है ? हर धर्मो के धार्मिक स्थलों से आवाज़ सुबह ही निकलती है उनसे तकलीफ नही ?आखिर आप उन लोगो पे सवाल क्यों नही खड़ा करते जो आरक्षण के लिए रेप, दंगा , हत्या जैसे कार्य करते है। तो ये गुंडा गर्दी की किस श्रेणी में है? समझ मे नही आया कि सोनू की जगह लोग अर्जित को पसंद करने लगे ये सजी फ्रस्टेशन है या कुछ और...
जन सुचना अधिकार पर सरकार की छेड़छड़ क्यों??
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जन सूचना अधिकार पर सरकार की छेड़छाड़ क्यों? आर. टी. आई. एक्ट 2005 एक मज़बूत हथियार है जो जन सुचना अधिकार के तहत जनता को हासिल हुआ है। आर. टी. आई. के माध्यम से जन क्रांति लाइ गई। श्री अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री बन गए और कितने ही उपेछित वंचित लोगों को उनका अधिकार मिल गया । आज सरकार इस अधिकार को कमजोर करने के बारे में विचार कर रही है कुछ संशोधन करके उसकी उपियोगिता के दायरे को जटिल बनाना चाहती है। यह एक्ट जब पारित हुआ था सारे विकल्पों को ध्यान में रखकर उसको मज़बूत जन सूचना अधिकार बनाया गया था। ऐसे में संशोधनो का औचित्य क्या है यह शंकाओं को जन्म दे रहा है जन सूचना के हथियार को और उपयोगी और सस्ता बनाने के बजाय महंगा और जटिल बनाना लोकशक्ति को कमज़ोर करना है। यह जनतांत्रिक मूल्यों के प्रति उपेछा का रवैया कहा जा सकता है इसलिए इस तरफ हुकूमत का ध्यान आकृष्ट करना हम सब का फ़र्ज़ है केंद्र सरकार आर. टी. आई. एक्ट में कोई तरमीम न करे यह जनहित में नही है। मौजूदा सरकार इस बात पर भी ग़ौर करे कि 2014 में एन. डी. ए. सरकार बनाने में आर. टी. आई. एक्टिविस्ट का ...
Evm मामले पर चुनाव आयोग को नोटिस: सुप्रीम कोर्ट
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चुनाव आयोग को EVM मामले पर नोटिस: सुप्रीम कोर्ट उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यो में चुनाव के पश्चात भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड बहुमत लगातार सवाल खड़ा करता रही है । यू पी से बहन कुमारी मायावती लगातार EVM पे सवाल खड़ा करती रही । उनकी मेहनत कुछ हद तक रंग तो लायी है। इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर दी है और कहा है जल्द ही स्पष्टीकरण दे। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि EVM की सी. बी.आई. जांच होनी चाहिए और साथ ही साथ अमेरिका के इंजिनीयर्स भी इसकी जांच करें। मायावती ने आरोप लगाया था जी यह बहुमत जनता जे द्वारा दो गयी बहुमत नही बल्कि मशीन द्वारा दी गयी बहुमत है। इस मामले को 11 मार्च से लगातार मायावती जी उठाये रही। अब देखना है कि क्या होता है चुनाव आयोग क्या स्पष्टीकरण देता है? यदि जांच हो जाती है तो मामला सबके सामने आ जायेगा। बी.जे. पी. नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने एक बार सुंझाव दिया था कि EVM मशीन के साथ उसमे स्लिप भी लगी होनी चाहिये। आप जिसको वोट दे उसके नाम और निशान के साथ स्लिप बहार आये और वही बगल में रखे बैलेट बॉक्स में दाल दे। इससे...
मुख्यमंत्री व पांच मंत्रियो के विभागों में फ़ेर बदल
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मुख्यमंत्री व पांच मंत्रियो के विभागों में फ़ेर बदल योगी आदित्यनाथ की सरकार ने तो बहुत तेज़ी से काम शुरू कर दिया है। काम शुरू होने के साथ उसमे कुछ खामिया भी है , लेकिन उम्मीद है जल्द ही इसका भी निस्तारण योगी सरकार कर लेगी। नयी नवेली सरकार है अनुभव की भी कमी है तो ग़लतिया होंगी ही परंतु मई सोचता हूं कि प्रधानमंत्री जी नेतृत्व करेंगे तो कमिया दूर हो जाएंगी। आप को बताते चले की स्वामी प्रसाद मौर्य से नगरीय रोज़गार एवं ग़रीबी उन्मूलन विभाग ले लिया गया है। यह विभाग नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को दे दिया गया है। सामान्यतः नगरीय रोज़गार और ग़रीबी उन्मूलन विभाग नगर विकास मंत्री के ही पास रहता आया है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री श्री लक्ष्मीनारायण चौधरी को मुस्लिम वक़्फ़ एवं हज विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है मोहसिन रज़ा को केवल राज्य मंत्री के तौर पर ही रखा गया है जो श्री लक्ष्मीनारायण चौधरी के अधीन कार्य करेंगे।। दानिश अलमदार
इतिहास के साक्ष्यो के साथ छेड़छाड़ अपराधः श्री ह्रदय नारायण दिक्षित
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आज दैनिक जागरण में श्री ह्रदय नारायण दीक्षित का एक लेख छपा है जिसमे उन्होंने बाबरी मस्जिद एवं राम जन्मभूमि के सन्दर्भ में इतिहास का हवाला देते हुए लिखा है कि इतिहास और पुरातात्विक साक्ष्यो के साथ छेड़छाड़ अपराध है । श्री ह्रदय नारायण दीक्षित वर्त्तमान में उन्नाव जनपद के भगवत नगर विधानसभा से विधायक है और विधानसभा स्पीकर पद के लिए भी उनका नाम ज़ोरोशोर से चल रहा है। श्री दीक्षित ने जिस सन्दर्भ मेये बात लिखी है उसमें इन्होंने कुछ किताबो का ज़िक्र भी किया है और इस बात पर ज़ोर दिया है कि ऐतिहासिक प्रमाणिक्ताओ को विलोपित करना अपराध है। मैं इस बात का समर्थन करते हुए उनसे पूछना चाहता हु की अजमेर का किला जिसे अकबर ने बनवाया था उसका नाम परिवर्तित करना अपराध की किस श्रेणी में आता है? मोहल्लो व् शहरो का नाम बदलना जैसे गोरखपुर के अलीनगर को आर्यनगर, उर्दू बाजार को हिंदी बाजार और मियाबाज़ार को मायाबाज़ार में बदलने को आप किस श्रेणी में रखते है? भारत गंगा जमुनी संस्कृति का राष्ट्र है हमारा देश अनेकता में एकता के सूत्र से बंधा हुआ है। इस देश का सर्व धर्म समभाव मूल मन्त्र है। भारत में कोई एक वि...
किसान और उसके साथ छल
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किसान और उसके साथ छल चुनाव आते ही हर नेता की ज़बान पे ग़रीब और किसान ही सुनाई पड़ता है परंतु शायद घोषड़ापत्र कुछ और होता है हकीकत कुछ और। यही हाल उत्तर प्रदेश के 2017 विधानसभा चुनाव में हुआ नज़र आ रहा है। इधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ फैसले पे फैसले लें रही है,कुछ फैसले तो बहोत अच्छे है। इधर योगी सरकार ने केंद्र पर दबाव बनाना शुरू किया कि किसानो का क़र्ज़ माफ़ किया जाये। तो अरुण जेटली जी ने यू-टर्न ले लिया है। आखिर में कह ही दिया की क़र्ज़ माफ़ी नही होगी। क्या इसे ही ग़रीबो की सरकार कहते है? क्या ऐसे लोग ही ग़रीबो के मसीहा है जो अपने वादों पे कभी खरे नही उतरते? इंडियन नेशनल कांग्रेस के टाइम में थोड़ी महगाई क्या बढ़ी की लोग ऊपर नीचे होने लगे थे और आज यही महगाई पे किसी की आवाज़ सुनाई नही दे रही है। यही हाल लोकसभा चुनाव 2014 में भी हुआ था कि किसानों का क़र्ज़ माफ़ होगा और आखिर में राजनाथ सिंह ने कह दिया की किसान क़र्ज़ माफ़ी की उम्मीद न रखे। सरकार तो सिर्फ उद्द्योगपतियो के क़र्ज़ माफ़ करेगी ना? माल्या जैसे लोग भारत से बाहर निकल जाये और सरकार को खबर तक न हो आखिर कैसे? जे. एन. यू. में बवाल हुआ ...
क्या कोई राजनीतिक पार्टी पूरा देश है?
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क्या कोई राजनीतिक पार्टी पूरा देश है? मेरा सवाल बस इतना है कि क्या कोई राजनीतिक पार्टी देश हो सकती है! हैरान कर देने वाली बात है कि यदि मेरी विचारधारा यदि किसी से न मिले तो मुझे देशद्रोही कह दिया जाये ? आखिर क्यों ऐसा हो रहा है ? राजनीतिक दल कोई भी हो जन सब का बस एक मुद्दा होता है "सब का साथ अपना विकास" । सपा, बसपा, कांग्रेस हो या भाजपा सब कही न कही अपने राजनीतिक फायदे के लिए पूरे समाज को कही न कही बाटने की कोशिश किया करते है। और इन के चक्कर में हम अपना भाईचारा कही खो देते है। यदि राजनीतिक पार्टियां इतनी ही अच्छी है तो वो केवल विकास और अपने किये हुए कार्य के बल पे चुनाव क्यों नही लड़ते ? क्यों वो हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई के नाम पे ही चुनाव लड़ा जाता है? जिन शहरो और ज़िलों पर सबसे ज़्यादा राजनीती होती है वही विकास के मामले में सबसे पीछे खड़े नज़र आते है। चाहे वो शहर मुज़फ्फरनगर हो या फिर गोरखपुर या फिर अयोध्या हो या कोई अन्य । आप किसी भी शहर को विकास में आगे बढ़ते नही देख पाएंगे। यदि इन शहरो का विकास हो गया तो इनकी राजनीती ख़त्म होने को आ जायेगी। आप समस्त लोगो से विनम्र निवेदन है ...